युधिष्ठिरने कहा—‘भगवन्! मुझे अपने दोनों चाचाओंका पता नहीं लग रहा है; न जाने वे दोनों और पुत्र-शोकसे व्याकुल तपस्विनी माता गान्धारी यहाँसे कहाँ चले गये॥ ३८॥✎ 91
नाहं वेद गतिं पित्रोर्भगवन् क्व गतावितः।
अम्बा वा हतपुत्राऽऽर्ता क्व गता च तपस्विनी॥ ३८
युधिष्ठिरने कहा—‘भगवन्! मुझे अपने दोनों चाचाओंका पता नहीं लग रहा है; न जाने वे दोनों और पुत्र-शोकसे व्याकुल तपस्विनी माता गान्धारी यहाँसे कहाँ चले गये॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 143) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/38/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)