महाराज! समस्त प्राणियोंको जीवनदान देनेवाले वे ही भगवान् इस समय इस पृथ्वीतलपर देवद्रोहियोंका नाश करनेके लिये कालरूपसे अवतीर्ण हुए हैं॥ ४८॥✎ 91
सोऽयमद्य महाराज भगवान् भूतभावनः।
कालरूपोऽवतीर्णोऽस्यामभावाय सुरद्विषाम्॥ ४८
महाराज! समस्त प्राणियोंको जीवनदान देनेवाले वे ही भगवान् इस समय इस पृथ्वीतलपर देवद्रोहियोंका नाश करनेके लिये कालरूपसे अवतीर्ण हुए हैं॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 144) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/48/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)