प्यारे भीमसेन! मेरी बायीं जाँघ, आँख और भुजा बार-बार फड़क रही हैं। हृदय जोरसे धड़क रहा है। अवश्य ही बहुत जल्दी कोई अनिष्ट होनेवाला है॥ ११॥✎ 93
ऊर्वक्षिबाहवो मह्यं स्फुरन्त्यङ्ग पुनः पुनः।
वेपथुश्चापि हृदये आराद्दास्यन्ति विप्रियम्॥ ११
प्यारे भीमसेन! मेरी बायीं जाँघ, आँख और भुजा बार-बार फड़क रही हैं। हृदय जोरसे धड़क रहा है। अवश्य ही बहुत जल्दी कोई अनिष्ट होनेवाला है॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 147) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)