श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.32

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तथैवानुचराः शौरेः श्रुतदेवोद्धवादयः।

सुनन्दनन्दशीर्षण्या ये चान्ये सात्वतर्षभाः॥ ३२

tathaivānucarāḥ śaureḥ śrutadevoddhavādayaḥ|

sunandanandaśīrṣaṇyā ye cānye sātvatarṣabhāḥ|| 32

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णके सेवक श्रुतदेव, उद्धव आदि और दूसरे सुनन्द-नन्द आदि प्रधान यदुवंशी, जो भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामके बाहुबलसे सुरक्षित हैं, सब-के-सब सकुशल हैं न? हमसे अत्यन्त प्रेम करनेवाले वे लोग कभी हमारा कुशल-मंगल भी पूछते हैं?॥ ३२-३३॥

यह अर्थ श्लोक 32–33 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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