श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.34

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

भगवानपि गोविन्दो ब्रह्मण्यो भक्तवत्सलः।

कच्चित्पुरे सुधर्मायां सुखमास्ते सुहृद‍्वृतः॥ ३४

bhagavānapi govindo brahmaṇyo bhaktavatsalaḥ|

kaccitpure sudharmāyāṃ sukhamāste suhṛdvṛtaḥ|| 34

अर्थ

भक्तवत्सल ब्राह्मणभक्त भगवान् श्रीकृष्ण अपने स्वजनोंके साथ द्वारकाकी सुधर्मा सभामें सुखपूर्वक विराजते हैं न?॥ ३४॥

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