उन्हें युद्धके प्रारम्भमें भगवान्के द्वारा उपदेश किया हुआ गीता-ज्ञान पुनः स्मरण हो आया, जिसकी कालके व्यवधान और कर्मोंके विस्तारके कारण प्रमादवश कुछ दिनोंके लिये विस्मृति हो गयी थी॥ ३०॥
गीतं भगवता ज्ञानं यत् तत् सङ्ग्राममूर्धनि।
कालकर्मतमोरुद्धं पुनरध्यगमद् विभुः॥ ३०
उन्हें युद्धके प्रारम्भमें भगवान्के द्वारा उपदेश किया हुआ गीता-ज्ञान पुनः स्मरण हो आया, जिसकी कालके व्यवधान और कर्मोंके विस्तारके कारण प्रमादवश कुछ दिनोंके लिये विस्मृति हो गयी थी॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 155) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/30/