श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

गीतं भगवता ज्ञानं यत् तत् सङ्ग्राममूर्धनि।

कालकर्मतमोरुद्धं पुनरध्यगमद् विभुः॥ ३०

gītaṃ bhagavatā jñānaṃ yat tat saṅgrāmamūrdhani|

kālakarmatamoruddhaṃ punaradhyagamad vibhuḥ|| 30

अर्थ

उन्हें युद्धके प्रारम्भमें भगवान्‌के द्वारा उपदेश किया हुआ गीता-ज्ञान पुनः स्मरण हो आया, जिसकी कालके व्यवधान और कर्मोंके विस्तारके कारण प्रमादवश कुछ दिनोंके लिये विस्मृति हो गयी थी॥ ३०॥

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