॥ श्रीहरिः ॥
स्वराट् पौत्रं विनयिनमात्मनः सुसमं गुणैः।
तोयनीव्याः पतिं भूमेरभ्यषिञ्चद्गजाह्वये॥ ३८
svarāṭ pautraṃ vinayinamātmanaḥ susamaṃ guṇaiḥ|
toyanīvyāḥ patiṃ bhūmerabhyaṣiñcadgajāhvaye|| 38
अर्थ
उन्होंने अपने विनयी पौत्र परीक्षित्को, जो गुणोंमें उन्हींके समान थे, समुद्रसे घिरी हुई पृथ्वीके सम्राट् पदपर हस्तिनापुरमें अभिषिक्त किया॥ ३८॥
स्वराट् पौत्रं विनयिनमात्मनः सुसमं गुणैः।
तोयनीव्याः पतिं भूमेरभ्यषिञ्चद्गजाह्वये॥ ३८
उन्होंने अपने विनयी पौत्र परीक्षित्को, जो गुणोंमें उन्हींके समान थे, समुद्रसे घिरी हुई पृथ्वीके सम्राट् पदपर हस्तिनापुरमें अभिषिक्त किया॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 156) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/38/