श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.38

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स्वराट् पौत्रं विनयिनमात्मनः सुसमं गुणैः।

तोयनीव्याः पतिं भूमेरभ्यषिञ्चद्गजाह्वये॥ ३८

svarāṭ pautraṃ vinayinamātmanaḥ susamaṃ guṇaiḥ|

toyanīvyāḥ patiṃ bhūmerabhyaṣiñcadgajāhvaye|| 38

अर्थ

उन्होंने अपने विनयी पौत्र परीक्षित‍्को, जो गुणोंमें उन्हींके समान थे, समुद्रसे घिरी हुई पृथ्वीके सम्राट् पदपर हस्तिनापुरमें अभिषिक्त किया॥ ३८॥

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