श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.39

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

मथुरायां तथा वज्रं शूरसेनपतिं ततः।

प्राजापत्यां निरूप्येष्टिमग्नीनपिबदीश्‍वरः॥ ३९

mathurāyāṃ tathā vajraṃ śūrasenapatiṃ tataḥ|

prājāpatyāṃ nirūpyeṣṭimagnīnapibadīśvaraḥ|| 39

अर्थ

उन्होंने मथुरामें शूरसेनाधिपतिके रूपमें अनिरुद्धके पुत्र वज्रका अभिषेक किया। इसके बाद समर्थ युधिष्ठिरने प्राजापत्य यज्ञ करके आहवनीय आदि अग्‍नियोंको अपनेमें लीन कर दिया अर्थात् गृहस्थाश्रमके धर्मसे मुक्त होकर उन्होंने संन्यास ग्रहण किया॥ ३९॥

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