द्रौपदीने देखा कि अब पाण्डवलोग निरपेक्ष हो गये हैं; तब वे अनन्यप्रेमसे भगवान् श्रीकृष्णका ही चिन्तन करके उन्हें प्राप्त हो गयीं॥ ५०॥
द्रौपदी च तदाऽऽज्ञाय पतीनामनपेक्षताम्।
वासुदेवे भगवति ह्येकान्तमतिराप तम्॥ ५०
द्रौपदीने देखा कि अब पाण्डवलोग निरपेक्ष हो गये हैं; तब वे अनन्यप्रेमसे भगवान् श्रीकृष्णका ही चिन्तन करके उन्हें प्राप्त हो गयीं॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 157) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/50/