भगवान्के प्यारे भक्त पाण्डवोंके महाप्रयाणकी इस परम पवित्र और मंगलमयी कथाको जो पुरुष श्रद्धासे सुनता है, वह निश्चय ही भगवान्की भक्ति और मोक्ष प्राप्त करता है॥ ५१॥✎ 104
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां प्रथमस्कन्धे पाण्डवस्वर्गारोहणं नाम पञ्चदशोऽध्यायः॥ १५॥
यः श्रद्धयैतद् भगवत्प्रियाणां
पाण्डोः सुतानामिति सम्प्रयाणम्।
शृणोत्यलं स्वस्त्ययनं पवित्रं
लब्ध्वा हरौ भक्तिमुपैति सिद्धिम्॥ ५१
भगवान्के प्यारे भक्त पाण्डवोंके महाप्रयाणकी इस परम पवित्र और मंगलमयी कथाको जो पुरुष श्रद्धासे सुनता है, वह निश्चय ही भगवान्की भक्ति और मोक्ष प्राप्त करता है॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 157) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)