श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.9

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

यत्तेजसा नृपशिरोऽङ्‌घ्रिमहन्मखार्थे

आर्योऽनुजस्तव गजायुतसत्त्ववीर्यः।

तेनाहृताः प्रमथनाथमखाय भूपा

यन्मोचितास्तदनयन् बलिमध्वरे ते॥ ९

yattejasā nṛpaśiro'ṅghrimahanmakhārthe

āryo'nujastava gajāyutasattvavīryaḥ|

tenāhṛtāḥ pramathanāthamakhāya bhūpā

yanmocitāstadanayan balimadhvare te|| 9

अर्थ

दस हजार हाथियोंकी शक्ति और बलसे सम्पन्‍न आपके इन छोटे भाई भीमसेनने उन्हींकी शक्तिसे राजाओंके सिरपर पैर रखनेवाले अभिमानी जरासन्धका वध किया था; तदनन्तर उन्हीं भगवान्‌ने उन बहुत-से राजाओंको मुक्त किया, जिनको जरासन्धने महाभैरव-यज्ञमें बलि चढ़ानेके लिये बंदी बना रखा था। उन सब राजाओंने आपके यज्ञमें अनेकों प्रकारके उपहार दिये थे॥ ९॥ ✎ 95

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #95 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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