श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.10

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

सूत उवाच

यदा परीक्षित् कुरुजाङ्गलेऽवसन्

कलिं प्रविष्टं निजचक्रवर्तिते।

निशम्य वार्तामनतिप्रियां ततः

शरासनं संयुगशौण्डिराददे१॥ १०

yadā parīkṣit kurujāṅgale'vasan

kaliṃ praviṣṭaṃ nijacakravartite|

niśamya vārtāmanatipriyāṃ tataḥ

śarāsanaṃ saṃyugaśauṇḍirādade|| 10

अर्थ

सूतजीने कहा—जिस समय राजा परीक्षित् कुरुजांगल देशमें सम्राट्के रूपमें निवास कर रहे थे, उस समय उन्होंने सुना कि मेरी सेनाद्वारा सुरक्षित साम्राज्यमें कलियुगका प्रवेश हो गया है। इस समाचारसे उन्हें दुःख तो अवश्य हुआ; परन्तु यह सोचकर कि युद्ध करनेका अवसर हाथ लगा, वे उतने दुःखी नहीं हुए। इसके बाद युद्धवीर परीक्षित‍्ने धनुष हाथमें ले लिया॥ १०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—शौण्ड आददे।

    (मुद्रित पृष्ठ 159)

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