श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.17

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तस्यैवं वर्तमानस्य पूर्वेषां वृत्तिमन्वहम्।

नातिदूरे किलाश्‍चर्यं यदासीत् तन्‍निबोध मे॥ १७

tasyaivaṃ vartamānasya pūrveṣāṃ vṛttimanvaham|

nātidūre kilāścaryaṃ yadāsīt tannibodha me|| 17

अर्थ

इस प्रकार वे दिन-दिन पाण्डवोंके आचरणका अनुसरण करते हुए दिग्विजय कर रहे थे। उन्हीं दिनों उनके शिविरसे थोड़ी ही दूरपर एक आश्‍चर्यजनक घटना घटी। वह मैं आपको सुनाता हूँ॥ १७॥

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