श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.18

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

धर्मः पदैकेन चरन् विच्छायामुपलभ्य गाम्।

पृच्छति स्माश्रुवदनां विवत्सामिव मातरम्॥ १८

dharmaḥ padaikena caran vicchāyāmupalabhya gām|

pṛcchati smāśruvadanāṃ vivatsāmiva mātaram|| 18

अर्थ

धर्म बैलका रूप धारण करके एक पैरसे घूम रहा था। एक स्थानपर उसे गायके रूपमें पृथ्वी मिली। पुत्रकी मृत्युसे दुःखिनी माताके समान उसके नेत्रोंसे आँसुओंके झरने झर रहे थे। उसका शरीर श्रीहीन हो गया था। धर्म पृथ्वीसे पूछने लगा॥ १८॥

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