श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.11

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

एष राज्ञां२ परो धर्मो ह्यार्तानामार्तिनिग्रहः।

अत एनं वधिष्यामि भूतद्रुहमसत्तमम्॥ ११

eṣa rājñāṃ paro dharmo hyārtānāmārtinigrahaḥ|

ata enaṃ vadhiṣyāmi bhūtadruhamasattamam|| 11

अर्थ

राजाओंका परम धर्म यही है कि वे दुःखियोंका दुःख दूर करें। यह महादुष्ट और प्राणियोंको पीड़ित करनेवाला है। अतः मैं अभी इसे मार डालूँगा॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—राज्ञः।

    (मुद्रित पृष्ठ 164)

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