श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.10

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

यस्य राष्ट्रे प्रजाः स१र्वास्त्रस्यन्ते साध्व्यसाधुभिः।

तस्य मत्तस्य नश्यन्ति कीर्तिरायुर्भगो गतिः॥ १०

yasya rāṣṭre prajāḥ sarvāstrasyante sādhvyasādhubhiḥ|

tasya mattasya naśyanti kīrtirāyurbhago gatiḥ|| 10

अर्थ

देवि! जिस राजाके राज्यमें दुष्टोंके उपद्रवसे सारी प्रजा त्रस्त रहती है उस मतवाले राजाकी कीर्ति, आयु, ऐश्‍वर्य और परलोक नष्ट हो जाते हैं॥ १०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—मातर्हिंस्यन्ते।

    (मुद्रित पृष्ठ 164)

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