श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.28

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

इति धर्मं महीं चैव सान्त्वयित्वा महारथः।

निशातमाददे खड्गं कलयेऽधर्महेतवे॥ २८

iti dharmaṃ mahīṃ caiva sāntvayitvā mahārathaḥ|

niśātamādade khaḍgaṃ kalaye'dharmahetave|| 28

अर्थ

महारथी परीक्षित‍्ने इस प्रकार धर्म और पृथ्वीको सान्त्वना दी। फिर उन्होंने अधर्मके कारणरूप कलियुगको मारनेके लिये तीक्ष्ण तलवार उठायी॥ २८॥

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