सूतजी कहते हैं—परीक्षित्की यह आज्ञा सुनकर कलियुग सिहर उठा। यमराजके समान मारनेके लिये उद्यत, हाथमें तलवार लिये हुए परीक्षित्से वह बोला—॥ ३५॥
परीक्षितैवमादिष्टः स कलिर्जातवेपथुः।
तमुद्यतासिमाहेदं दण्डपाणिमिवोद्यतम्॥ ३५
सूतजी कहते हैं—परीक्षित्की यह आज्ञा सुनकर कलियुग सिहर उठा। यमराजके समान मारनेके लिये उद्यत, हाथमें तलवार लिये हुए परीक्षित्से वह बोला—॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.17.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 166) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/17/35/