श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.39

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

पुनश्‍च याचमानाय जातरूपमदात्प्रभुः।

ततोऽनृतं मदं२ कामं रजो वैरं च पञ्चमम्॥ ३९

punaśca yācamānāya jātarūpamadātprabhuḥ|

tato'nṛtaṃ madaṃ kāmaṃ rajo vairaṃ ca pañcamam|| 39

अर्थ

उसने और भी स्थान माँगे। तब समर्थ परीक्षित‍्ने उसे रहनेके लिये एक और स्थान—‘सुवर्ण’ (धन)—दिया। इस प्रकार कलियुगके पाँच स्थान हो गये—झूठ, मद, काम, वैर और रजोगुण॥ ३९॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—मदः कामो।

    (मुद्रित पृष्ठ 167)

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