॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.17.5
कस्त्वं मच्छरणे लोके बलाद्धंस्यबलान् बली।
नरदेवोऽसि वेषेण नटवत्कर्मणाद्विजः॥ ५
kastvaṃ maccharaṇe loke balāddhaṃsyabalān balī|
naradevo'si veṣeṇa naṭavatkarmaṇādvijaḥ|| 5
अर्थ
अरे! तू कौन है, जो बलवान् होकर भी मेरे राज्यके इन दुर्बल प्राणियोंको बलपूर्वक मार रहा है? तूने नटकी भाँति वेष तो राजाका-सा बना रखा है, परन्तु कर्मसे तू शूद्र जान पड़ता है॥ ५॥