श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.6

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

यस्त्वं कृष्णे गते दूरं सह गाण्डीवधन्वना।

शोच्योऽस्यशोच्यान् रहसि प्रहरन् वधमर्हसि॥ ६

yastvaṃ kṛṣṇe gate dūraṃ saha gāṇḍīvadhanvanā|

śocyo'syaśocyān rahasi praharan vadhamarhasi|| 6

अर्थ

हमारे दादा अर्जुनके साथ भगवान् श्रीकृष्णके परमधाम पधार जानेपर इस प्रकार निर्जन स्थानमें निरपराधोंपर प्रहार करनेवाला तू अपराधी है, अतः वधके योग्य है॥ ६॥

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