॥ श्रीहरिः ॥
इत्युक्त्वा रोषताम्राक्षो वयस्यानृषिबालकः।
कौशिक्याप उपस्पृश्य वाग्वज्रं विससर्ज ह॥ ३६
ityuktvā roṣatāmrākṣo vayasyānṛṣibālakaḥ|
kauśikyāpa upaspṛśya vāgvajraṃ visasarja ha|| 36
अर्थ
अपने साथी बालकोंसे इस प्रकार कहकर क्रोधसे लाल-लाल आँखोंवाले उस ऋषिकुमारने कौशिकी नदीके जलसे आचमन करके अपने वाणी-रूपी वज्रका प्रयोग किया ॥ ३६॥
इत्युक्त्वा रोषताम्राक्षो वयस्यानृषिबालकः।
कौशिक्याप उपस्पृश्य वाग्वज्रं विससर्ज ह॥ ३६
अपने साथी बालकोंसे इस प्रकार कहकर क्रोधसे लाल-लाल आँखोंवाले उस ऋषिकुमारने कौशिकी नदीके जलसे आचमन करके अपने वाणी-रूपी वज्रका प्रयोग किया ॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 172) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/36/