॥ श्रीहरिः ॥
कृष्णे गते भगवति शास्तर्युत्पथगामिनाम्।
तद्भिन्नसेतू५नद्याहं शास्मि पश्यत मे बलम्॥ ३५
kṛṣṇe gate bhagavati śāstaryutpathagāminām|
tadbhinnasetūnadyāhaṃ śāsmi paśyata me balam|| 35
अर्थ
अतएव उन्मार्गगामियोंके शासक भगवान् श्रीकृष्णके परमधाम पधार जानेपर इन मर्यादा तोड़नेवालोंको आज मैं दण्ड देता हूँ। मेरा तपोबल देखो’॥ ३५॥
कृष्णे गते भगवति शास्तर्युत्पथगामिनाम्।
तद्भिन्नसेतूनद्याहं शास्मि पश्यत मे बलम्॥ ३५
अतएव उन्मार्गगामियोंके शासक भगवान् श्रीकृष्णके परमधाम पधार जानेपर इन मर्यादा तोड़नेवालोंको आज मैं दण्ड देता हूँ। मेरा तपोबल देखो’॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 172) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/35/टिप्पणियाँ
- ५
प्रा० पा०—सेतुमद्या०।
(मुद्रित पृष्ठ 172)