श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.35

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

कृष्णे गते भगवति शास्तर्युत्पथगामिनाम्।

तद्भिन्‍नसेतू५नद्याहं शास्मि पश्यत मे बलम्॥ ३५

kṛṣṇe gate bhagavati śāstaryutpathagāminām|

tadbhinnasetūnadyāhaṃ śāsmi paśyata me balam|| 35

अर्थ

अतएव उन्मार्गगामियोंके शासक भगवान् श्रीकृष्णके परमधाम पधार जानेपर इन मर्यादा तोड़नेवालोंको आज मैं दण्ड देता हूँ। मेरा तपोबल देखो’॥ ३५॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—सेतुमद्या०।

    (मुद्रित पृष्ठ 172)

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