जो लोग भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाकथा कहते रहते हैं, उस कथामृतका पान करते रहते हैं और इन दोनों ही साधनोंके द्वारा उनके चरण-कमलोंका स्मरण करते रहते हैं, उन्हें अन्तकालमें भी मोह नहीं होता॥ ४॥✎ 109
नोत्तमश्लोकवार्तानां जुषतां तत्कथामृतम्।
स्यात्सम्भ्रमोऽन्तकालेऽपि स्मरतां तत्पदाम्बुजम्॥ ४
जो लोग भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाकथा कहते रहते हैं, उस कथामृतका पान करते रहते हैं और इन दोनों ही साधनोंके द्वारा उनके चरण-कमलोंका स्मरण करते रहते हैं, उन्हें अन्तकालमें भी मोह नहीं होता॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 168) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)