श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.26

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तं द‍्व्यष्टवर्षं सुकुमारपाद-

करोरुबाह्वंसकपोलगात्रम् ।

चार्वायताक्षोन्‍नसतुल्यकर्ण

सुभ्र्वाननं कम्बुसुजातकण्ठम्॥ २६

taṃ dvyaṣṭavarṣaṃ sukumārapāda-

karorubāhvaṃsakapolagātram |

cārvāyatākṣonnasatulyakarṇa

subhrvānanaṃ kambusujātakaṇṭham|| 26

अर्थ

सोलह वर्षकी अवस्था थी। चरण, हाथ, जंघा, भुजाएँ, कंधे, कपोल और अन्य सब अंग अत्यन्त सुकुमार थे। नेत्र बड़े-बड़े और मनोहर थे। नासिका कुछ ऊँची थी। कान बराबर थे। सुन्दर भौंहें थीं, इनसे मुख बड़ा ही शोभायमान हो रहा था। गला तो मानो सुन्दर शंख ही था॥ २६॥

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