श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.29

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

स विष्णुरातोऽतिथय आगताय

तस्मै सपर्यां शिरसाऽऽजहार।

ततो निवृत्ता ह्यबुधाः स्त्रियोऽर्भका

महासने सोपविवेश पूजितः॥ २९

sa viṣṇurāto'tithaya āgatāya

tasmai saparyāṃ śirasā''jahāra|

tato nivṛttā hyabudhāḥ striyo'rbhakā

mahāsane sopaviveśa pūjitaḥ|| 29

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने अतिथिरूपसे पधारे हुए श्रीशुकदेवजीको सिर झुकाकर प्रणाम किया और उनकी पूजा की। उनके स्वरूपको न जाननेवाले बच्चे और स्त्रियाँ उनकी यह महिमा देखकर वहाँसे लौट गये; सबके द्वारा सम्मानित होकर श्रीशुकदेवजी श्रेष्ठ आसनपर विराजमान हुए॥ २९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें