sadyo naśyanti vai puṃsāṃ viṣṇoriva suretarāḥ|| 34
अर्थ
महायोगिन्! जैसे भगवान् विष्णुके सामने दैत्यलोग नहीं ठहरते, वैसे ही आपकी सन्निधिसे बड़े-बड़े पाप भी तुरंत नष्ट हो जाते हैं॥ ३४॥
सांनिध्यात्ते महायोगिन्पातकानि महान्त्यपि।
सद्यो नश्यन्ति वै पुंसां विष्णोरिव सुरेतराः॥ ३४
महायोगिन्! जैसे भगवान् विष्णुके सामने दैत्यलोग नहीं ठहरते, वैसे ही आपकी सन्निधिसे बड़े-बड़े पाप भी तुरंत नष्ट हो जाते हैं॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.19.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 179) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/19/34/