श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.14

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तस्मादेकेन मनसा भगवान् सात्वतां पतिः।

श्रोतव्यः कीर्तितव्यश्‍च ध्येयः पूज्यश्‍च नित्यदा॥ १४

tasmādekena manasā bhagavān sātvatāṃ patiḥ|

śrotavyaḥ kīrtitavyaśca dhyeyaḥ pūjyaśca nityadā|| 14

अर्थ

इसलिये एकाग्र मनसे भक्तवत्सल भगवान्‌का ही नित्य-निरन्तर श्रवण, कीर्तन, ध्यान और आराधन करना चाहिये॥ १४॥✎ 26

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #26 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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