श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.28

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वासुदेवपरा वेदा वासुदेवपरा मखाः।

वासुदेवपरा योगा वासुदेवपराः क्रियाः॥ २८

vāsudevaparā vedā vāsudevaparā makhāḥ|

vāsudevaparā yogā vāsudevaparāḥ kriyāḥ|| 28

अर्थ

वेदोंका तात्पर्य श्रीकृष्णमें ही है। यज्ञोंके उद्देश्य श्रीकृष्ण ही हैं। योग श्रीकृष्णके लिये ही किये जाते हैं और समस्त कर्मोंकी परिसमाप्ति भी श्रीकृष्णमें ही है॥ २८॥

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