ऋषियो! आपने सम्पूर्ण विश्वके कल्याणके लिये यह बहुत सुन्दर प्रश्न किया है; क्योंकि यह प्रश्न श्रीकृष्णके सम्बन्धमें है और इससे भलीभाँति आत्मशुद्धि हो जाती है॥ ५॥✎ 25
मुनयः साधु पृष्टोऽहं भवद्भिर्लोकमङ्गलम्।
यत्कृतः कृष्णसंप्रश्नो येनात्मा सुप्रसीदति॥ ५
ऋषियो! आपने सम्पूर्ण विश्वके कल्याणके लिये यह बहुत सुन्दर प्रश्न किया है; क्योंकि यह प्रश्न श्रीकृष्णके सम्बन्धमें है और इससे भलीभाँति आत्मशुद्धि हो जाती है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/2/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)