इसके बाद सत्रहवें अवतारमें सत्यवतीके गर्भसे पराशरजीके द्वारा वे व्यासके रूपमें अवतीर्ण हुए, उस समय लोगोंकी समझ और धारणाशक्ति कम देखकर आपने वेदरूप वृक्षकी कई शाखाएँ बना दीं॥ २१॥✎ 3031
ततः सप्तदशे जातः सत्यवत्यां पराशरात्।
चक्रे वेदतरोः शाखा दृष्ट्वा पुंसोऽल्पमेधसः॥ २१
इसके बाद सत्रहवें अवतारमें सत्यवतीके गर्भसे पराशरजीके द्वारा वे व्यासके रूपमें अवतीर्ण हुए, उस समय लोगोंकी समझ और धारणाशक्ति कम देखकर आपने वेदरूप वृक्षकी कई शाखाएँ बना दीं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 90) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)