श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.42

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सर्ववेदेतिहासानां सारं सारं समुद‍्धृतम्।

स तु संश्रावयामास महाराजं परीक्षितम्॥ ४२

sarvavedetihāsānāṃ sāraṃ sāraṃ samuddhṛtam|

sa tu saṃśrāvayāmāsa mahārājaṃ parīkṣitam|| 42

अर्थ

इसमें सारे वेद और इतिहासोंका सार-सार संग्रह किया गया है। शुकदेवजीने राजा परीक्षित‍्को यह सुनाया॥ ४२॥

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