उन्हीं प्रभुने पहले कौमारसर्गमें सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार—इन चार ब्राह्मणोंके रूपमें अवतार ग्रहण करके अत्यन्त कठिन अखण्ड ब्रह्मचर्यका पालन किया॥ ६॥✎ 29
स एव प्रथमं देवः कौमारं सर्गमास्थितः।
चचार दुश्चरं ब्रह्मा ब्रह्मचर्यमखण्डितम्॥ ६
उन्हीं प्रभुने पहले कौमारसर्गमें सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार—इन चार ब्राह्मणोंके रूपमें अवतार ग्रहण करके अत्यन्त कठिन अखण्ड ब्रह्मचर्यका पालन किया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 89) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)