श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.31

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

येनैवाहं भगवतो वासुदेवस्य वेधसः।

मायानुभावमविदं येन गच्छन्ति तत्पदम्॥ ३१

yenaivāhaṃ bhagavato vāsudevasya vedhasaḥ|

māyānubhāvamavidaṃ yena gacchanti tatpadam|| 31

अर्थ

उस उपदेशसे ही जगत‍्के निर्माता भगवान् श्रीकृष्णकी मायाके प्रभावको मैं जान सका, जिसके जान लेनेपर उनके परमपदकी प्राप्ति हो जाती है॥ ३१॥✎ 48 49

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #48 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #49 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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