उन दीनवत्सल महात्माओंने जाते समय कृपा करके मुझे उस गुह्यतम ज्ञानका उपदेश किया, जिसका उपदेश स्वयं भगवान्ने अपने श्रीमुखसे किया है॥ ३०॥✎ 4849
ज्ञानं गुह्यतमं यत्तत्साक्षाद्भगवतोदितम्।
अन्ववोचन् गमिष्यन्तः कृपया दीनवत्सलाः॥ ३०
उन दीनवत्सल महात्माओंने जाते समय कृपा करके मुझे उस गुह्यतम ज्ञानका उपदेश किया, जिसका उपदेश स्वयं भगवान्ने अपने श्रीमुखसे किया है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 101) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)