श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.28

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एवं कृष्णमतेर्ब्रह्मन्‍नसक्तस्यामलात्मनः।

कालः प्रादुरभूत्काले तडित्२सौदामनी यथा॥ २८✎ 2243

evaṃ kṛṣṇamaterbrahmannasaktasyāmalātmanaḥ|

kālaḥ prādurabhūtkāle taḍitsaudāmanī yathā|| 28

अर्थ

व्यासजी! इस प्रकार भगवान्‌की कृपासे मेरा हृदय शुद्ध हो गया, आसक्ति मिट गयी और मैं श्रीकृष्णपरायण हो गया। कुछ समय बाद, जैसे एकाएक बिजली कौंध जाती है, वैसे ही अपने समयपर मेरी मृत्यु आ गयी॥ २८॥✎ 58 59 60 61 1280 1281

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—विद्युत्।

    (मुद्रित पृष्ठ 105)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (7)
  • #58 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #59 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #60 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #61 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1280 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: (प्रलय-कालीन → (प्रलयकालीन
  • #1281 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पांच-भौतिक → पांचभौतिक
  • #2243 टिप्पणी-चिह्नका स्थान: तडित्सौ|दामनी → तडित्|सौदामनी

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें