श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.9

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एकदा निर्गतां गेहाद्दुहन्तीं निशि गां पथि।

सर्पोऽदशत्पदा स्पृष्टः कृपणां कालचोदितः॥ ९

ekadā nirgatāṃ gehādduhantīṃ niśi gāṃ pathi|

sarpo'daśatpadā spṛṣṭaḥ kṛpaṇāṃ kālacoditaḥ|| 9

अर्थ

एक दिनकी बात है, मेरी माँ गौ दुहनेके लिये रातके समय घरसे बाहर निकली। रास्तेमें उसके पैरसे साँप छू गया, उसने उस बेचारीको डस लिया। उस साँपका क्या दोष, कालकी ऐसी ही प्रेरणा थी॥ ९॥

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