श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.25

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तथायं चावतारस्ते भुवो भारजिहीर्षया।

२स्वानां चानन्यभावानामनुध्यानाय चासकृत्॥ २५✎ 2244

tathāyaṃ cāvatāraste bhuvo bhārajihīrṣayā|

svānāṃ cānanyabhāvānāmanudhyānāya cāsakṛt|| 25

अर्थ

तुम्हारा यह अवतार पृथ्वीका भार हरण करनेके लिये और तुम्हारे अनन्य प्रेमी भक्तजनोंके निरन्तर स्मरण-ध्यान करनेके लिये है॥ २५॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—स्वानामनन्य०।

    (मुद्रित पृष्ठ 109)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2244 टिप्पणी-चिह्नका स्थान: स्वा|नां → |स्वानां

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