स्वयम्प्रकाशस्वरूप श्रीकृष्ण! यह भयंकर तेज सब ओरसे मेरी ओर आ रहा है। यह क्या है, कहाँसे, क्यों आ रहा है—इसका मुझे बिलकुल पता नहीं है!॥ २६॥
किमिदं स्वित्कुतो वेति देवदेव न वेद्म्यहम्।
सर्वतोमुखमायाति तेजः परमदारुणम्॥ २६
स्वयम्प्रकाशस्वरूप श्रीकृष्ण! यह भयंकर तेज सब ओरसे मेरी ओर आ रहा है। यह क्या है, कहाँसे, क्यों आ रहा है—इसका मुझे बिलकुल पता नहीं है!॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 109) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/26/