फिर मेरे सामने ही तुमने द्रौपदीसे प्रतिज्ञा की थी कि ‘मानवती! जिसने तुम्हारे पुत्रोंका वध किया है, उसका सिर मैं उतार लाऊँगा’॥ ३८॥✎ 666768
प्रतिश्रुतं च भवता पाञ्चाल्यै शृण्वतो मम।
आहरिष्ये शिरस्तस्य यस्ते मानिनि पुत्रहा॥ ३८
फिर मेरे सामने ही तुमने द्रौपदीसे प्रतिज्ञा की थी कि ‘मानवती! जिसने तुम्हारे पुत्रोंका वध किया है, उसका सिर मैं उतार लाऊँगा’॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 110) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/38/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)