श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.38

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

प्रतिश्रुतं च भवता पाञ्चाल्यै शृण्वतो मम।

आहरिष्ये शिरस्तस्य यस्ते मानिनि पुत्रहा॥ ३८

pratiśrutaṃ ca bhavatā pāñcālyai śṛṇvato mama|

āhariṣye śirastasya yaste mānini putrahā|| 38

अर्थ

फिर मेरे सामने ही तुमने द्रौपदीसे प्रतिज्ञा की थी कि ‘मानवती! जिसने तुम्हारे पुत्रोंका वध किया है, उसका सिर मैं उतार लाऊँगा’॥ ३८॥✎ 66 67 68

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #66 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #67 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #68 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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