इस पापी कुलांगार आततायीने तुम्हारे पुत्रोंका वध किया है और अपने स्वामी दुर्योधनको भी दुःख पहुँचाया है। इसलिये अर्जुन! इसे मार ही डालो॥ ३९॥✎ 666768
तदसौ वध्यतां पाप आतताय्यात्मबन्धुहा।
भर्तुश्च विप्रियं वीर कृतवान् कुलपांसनः॥ ३९
इस पापी कुलांगार आततायीने तुम्हारे पुत्रोंका वध किया है और अपने स्वामी दुर्योधनको भी दुःख पहुँचाया है। इसलिये अर्जुन! इसे मार ही डालो॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 111) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)