tat kulaṃ pradahatyāśu sānubandhaṃ śucārpitam|| 48
अर्थ
जो उच्छृंखल राजा अपने कुकृत्योंसे ब्राह्मणकुलको कुपित कर देते हैं, वह कुपित ब्राह्मणकुल उन राजाओंको सपरिवार शोकाग्निमें डालकर शीघ्र ही भस्म कर देता है’॥ ४८॥
यैः कोपितं ब्रह्मकुलं राजन्यैरजितात्मभिः।
तत् कुलं प्रदहत्याशु सानुबन्धं शुचार्पितम्॥ ४८
जो उच्छृंखल राजा अपने कुकृत्योंसे ब्राह्मणकुलको कुपित कर देते हैं, वह कुपित ब्राह्मणकुल उन राजाओंको सपरिवार शोकाग्निमें डालकर शीघ्र ही भस्म कर देता है’॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 111) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/48/