yeṣāṃ na cānyadbhavataḥ padāmbujāt parāyaṇaṃ rājasu yojitāṃhasām|| 37
अर्थ
भक्तवाञ्छाकल्पतरु प्रभो! क्या अब आप अपने आश्रित और सम्बन्धी हमलोगोंको छोड़कर जाना चाहते हैं। आप जानते हैं कि आपके चरणकमलोंके अतिरिक्त हमें और किसीका सहारा नहीं है। पृथ्वीके राजाओंके तो हम यों ही विरोधी हो गये हैं॥ ३७॥✎ 1574
अप्यद्य नस्त्वं स्वकृतेहित प्रभो जिहाससि स्वित्सुहृदोऽनुजीविनः।
येषां न चान्यद्भवतः पदाम्बुजात् परायणं राजसु योजितांहसाम्॥ ३७
भक्तवाञ्छाकल्पतरु प्रभो! क्या अब आप अपने आश्रित और सम्बन्धी हमलोगोंको छोड़कर जाना चाहते हैं। आप जानते हैं कि आपके चरणकमलोंके अतिरिक्त हमें और किसीका सहारा नहीं है। पृथ्वीके राजाओंके तो हम यों ही विरोधी हो गये हैं॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.8.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 117) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/8/37/