ये कालरूप श्रीकृष्ण कब क्या करना चाहते हैं, इस बातको कभी कोई नहीं जानता। बड़े-बड़े ज्ञानी भी इसे जाननेकी इच्छा करके मोहित हो जाते हैं॥ १६॥✎ 1575
न ह्यस्य कर्हिचिद्राजन् पुमान् वेद विधित्सितम्।
यद्विजिज्ञासया युक्ता मुह्यन्ति कवयोऽपि हि॥ १६
ये कालरूप श्रीकृष्ण कब क्या करना चाहते हैं, इस बातको कभी कोई नहीं जानता। बड़े-बड़े ज्ञानी भी इसे जाननेकी इच्छा करके मोहित हो जाते हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.9.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 120) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/9/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)