श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.17

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तस्मादिदं दैवतन्त्रं व्यवस्य भरतर्षभ।

तस्यानुविहितोऽनाथा नाथ पाहि प्रजाः प्रभो॥ १७

tasmādidaṃ daivatantraṃ vyavasya bharatarṣabha|

tasyānuvihito'nāthā nātha pāhi prajāḥ prabho|| 17

अर्थ

युधिष्ठिर! संसारकी ये सब घटनाएँ ईश्‍वरेच्छाके अधीन हैं। उसीका अनुसरण करके तुम इस अनाथ प्रजाका पालन करो; क्योंकि अब तुम्हीं इसके स्वामी और इसे पालन करनेमें समर्थ हो॥ १७॥

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