तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णके साथ युधिष्ठिर हस्तिनापुर चले आये और उन्होंने वहाँ अपने चाचा धृतराष्ट्र और तपस्विनी गान्धारीको ढाढस बँधाया॥ ४८॥✎ 74
ततो युधिष्ठिरो गत्वा सहकृष्णो गजाह्वयम्।
पितरं सान्त्वयामास गान्धारीं च तपस्विनीम्॥ ४८
तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णके साथ युधिष्ठिर हस्तिनापुर चले आये और उन्होंने वहाँ अपने चाचा धृतराष्ट्र और तपस्विनी गान्धारीको ढाढस बँधाया॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.9.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 125) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/9/48/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)