॥ श्रीहरिः ॥
दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध)
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
दशमः स्कन्धः
(पूर्वार्धः)
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःभगवान्के द्वारा पृथ्वीको आश्वासन, वसुदेव-देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंकी हत्या69 श्लोक
पृष्ठ 118 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभगवान्का गर्भ-प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भ-स्तुति42 श्लोक
पृष्ठ 128 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य53 श्लोक
पृष्ठ 134 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःकंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना46 श्लोक
पृष्ठ 145 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःगोकुलमें भगवान्का जन्ममहोत्सव32 श्लोक
पृष्ठ 150 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःपूतना-उद्धार44 श्लोक
पृष्ठ 154 - 7अथ सप्तमोऽध्यायःशकट-भंजन और तृणावर्त-उद्धार37 श्लोक
पृष्ठ 162 - 8अथाष्टमोऽध्यायःनामकरण-संस्कार और बाललीला52 श्लोक
पृष्ठ 167 - 9अथ नवमोऽध्यायःश्रीकृष्णका ऊखलसे बाँधा जाना23 श्लोक
पृष्ठ 180 - 10अथ दशमोऽध्यायःयमलार्जुनका उद्धार43 श्लोक
पृष्ठ 189 - 11अथैकादशोऽध्यायःगोकुलसे वृन्दावन जाना तथा वत्सासुर और बकासुरका उद्धार59 श्लोक
पृष्ठ 195 - 12अथ द्वादशोऽध्यायःअघासुरका उद्धार44 श्लोक
पृष्ठ 203 - 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःब्रह्माजीका मोह और उसका नाश64 श्लोक
पृष्ठ 210 - 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःब्रह्माजीके द्वारा भगवान्की स्तुति61 श्लोक
पृष्ठ 220 - 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःधेनुकासुरका उद्धार और ग्वालबालोंको कालियनागके विषसे बचाना52 श्लोक
पृष्ठ 231 - 16अथ षोडशोऽध्यायःकालियपर कृपा67 श्लोक
पृष्ठ 238 - 17अथ सप्तदशोऽध्यायःकालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान्का व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना25 श्लोक
पृष्ठ 248 - 18अथाष्टादशोऽध्यायःप्रलम्बासुर-उद्धार32 श्लोक
पृष्ठ 252 - 19अथैकोनविंशोऽध्यायःगौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना16 श्लोक
पृष्ठ 256 - 20अथ विंशोऽध्यायःवर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन49 श्लोक
पृष्ठ 257 - 21अथैकविंशोऽध्यायःवेणुगीत20 श्लोक
पृष्ठ 264 - 22अथ द्वाविंशोऽध्यायःचीरहरण38 श्लोक
पृष्ठ 270 - 23अथ त्रयोविंशोऽध्यायःयज्ञपत्नियोंपर कृपा52 श्लोक
पृष्ठ 281 - 24अथ चतुर्विंशोऽध्यायःइन्द्रयज्ञ-निवारण38 श्लोक
पृष्ठ 289 - 25अथ पञ्चविंशोऽध्यायःगोवर्धनधारण33 श्लोक
पृष्ठ 292 - 26अथ षड्विंशोऽध्यायःनन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत25 श्लोक
पृष्ठ 297 - 27अथ सप्तविंशोऽध्यायःश्रीकृष्णका अभिषेक28 श्लोक
पृष्ठ 301 - 28अथाष्टाविंशोऽध्यायःवरुणलोकसे नन्दजीको छुड़ाकर लाना17 श्लोक
पृष्ठ 303 - 29अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःरासलीलाका आरम्भ48 श्लोक
पृष्ठ 307 - 30अथ त्रिंशोऽध्यायःश्रीकृष्णके विरहमें गोपियोंकी दशा45 श्लोक
पृष्ठ 316 - 31अथैकत्रिंशोऽध्यायःगोपिकागीत19 श्लोक
पृष्ठ 323 - 32अथ द्वात्रिंशोऽध्यायःभगवान्का प्रकट होकर गोपियोंको सान्त्वना देना22 श्लोक
पृष्ठ 327 - 33अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायःमहारास40 श्लोक
पृष्ठ 331 - 34अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायःसुदर्शन और शंखचूडका उद्धार32 श्लोक
पृष्ठ 347 - 35अथ पञ्चत्रिंशोऽध्यायःयुगलगीत26 श्लोक
पृष्ठ 350 - 36अथ षट्त्रिंशोऽध्यायःअरिष्टासुरका उद्धार और कंसका श्रीअक्रूरजीको व्रजमें भेजना40 श्लोक
पृष्ठ 356 - 37अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायःकेशी और व्योमासुरका उद्धार तथा नारदजीके द्वारा भगवान्की स्तुति34 श्लोक
पृष्ठ 361 - 38अथाष्टात्रिंशोऽध्यायःअक्रूरजीकी व्रजयात्रा43 श्लोक
पृष्ठ 366 - 39अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्ण-बलरामका मथुरागमन57 श्लोक
पृष्ठ 373 - 40अथ चत्वारिंशोऽध्यायःअक्रूरजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति30 श्लोक
पृष्ठ 381 - 41अथैकचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश52 श्लोक
पृष्ठ 386 - 42अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायःकुब्जापर कृपा, धनुषभंग और कंसकी घबड़ाहट38 श्लोक
पृष्ठ 392 - 43अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायःकुवलयापीडका उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश40 श्लोक
पृष्ठ 397 - 44अथ चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायःचाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार51 श्लोक
पृष्ठ 401 - 45अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्ण-बलरामका यज्ञोपवीत और गुरुकुलप्रवेश50 श्लोक
पृष्ठ 407 - 46अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायःउद्धवजीकी व्रजयात्रा49 श्लोक
पृष्ठ 414 - 47अथ सप्तचत्वारिंशोऽध्यायःउद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत69 श्लोक
पृष्ठ 421 - 48अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायःभगवान्का कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना36 श्लोक
पृष्ठ 434 - 49अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायःअक्रूरजीका हस्तिनापुर जाना31 श्लोक
पृष्ठ 439
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥