श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.59

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

दृष्ट्वा समत्वं तच्छौरेः सत्ये चैव व्यवस्थितिम्।

कंसस्तुष्टमना राजन् प्रहसन्‍निदमब्रवीत्॥ ५९

dṛṣṭvā samatvaṃ tacchaureḥ satye caiva vyavasthitim|

kaṃsastuṣṭamanā rājan prahasannidamabravīt|| 59

अर्थ

जब कंसने देखा कि वसुदेवजीका अपने पुत्रके जीवन और मृत्युमें समान भाव है एवं वे सत्यमें पूर्ण निष्ठावान् भी हैं, तब वह बहुत प्रसन्‍न हुआ और उनसे हँसकर बोला॥ ५९॥

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