कंस जानता था कि मैं पहले कालनेमि असुर था और विष्णुने मुझे मार डाला था। इससे उसने यदुवंशियोंसे घोर विरोध ठान लिया॥ ६८॥
आत्मानमिह संजातं जानन् प्राग् विष्णुना हतम्।
महासुरं कालनेमिं यदुभिः स व्यरुध्यत॥ ६८
कंस जानता था कि मैं पहले कालनेमि असुर था और विष्णुने मुझे मार डाला था। इससे उसने यदुवंशियोंसे घोर विरोध ठान लिया॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 128) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/68/