kva vāsaṃ jñātibhiḥ sārdhaṃ kṛtavān sātvatāṃpatiḥ|| 9
अर्थ
असुरोंको मुक्ति देनेवाले और भक्तोंको प्रेम वितरण करनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण अपने वात्सल्य-स्नेहसे भरे हुए पिताका घर छोड़कर व्रजमें क्यों चले गये? यदुवंशशिरोमणि भक्तवत्सल प्रभुने नन्द आदि गोप-बन्धुओंके साथ कहाँ-कहाँ निवास किया?॥ ९॥
कस्मान्मुकुन्दो भगवान् पितुर्गेहाद् व्रजं गतः।
क्व वासं ज्ञातिभिः सार्धं कृतवान् सात्वतांपतिः॥ ९
असुरोंको मुक्ति देनेवाले और भक्तोंको प्रेम वितरण करनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण अपने वात्सल्य-स्नेहसे भरे हुए पिताका घर छोड़कर व्रजमें क्यों चले गये? यदुवंशशिरोमणि भक्तवत्सल प्रभुने नन्द आदि गोप-बन्धुओंके साथ कहाँ-कहाँ निवास किया?॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 120) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/9/